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Mohit mishra (mukt)
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Mohit mishra (mukt) commented on vijay nikore's blog post आत्म-संवाद
"आपकी बेहतरीन रचनाओं मे से एक रचना और। हृदय आह्लादित हो गया आदरणीय"
Nov 29
Mohit mishra (mukt) commented on vijay nikore's blog post बिखराव
"वाह आदरणीय विजय सर वाह। शानदार भाव और मर्मस्पर्शी संवेदनाओं से परिपुर्ण रचना। बधाई"
Nov 24
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"सुन्दर पंक्तियाँ और अच्छी रचना आदरणीय। दिल से बधाई "
Nov 23
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय डॉ. साहब  नमन, आपके स्नेहाशीष के लिए कोटिशः धन्यवाद "
Nov 23
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय विजय सर , आपसे उत्साहवर्धन सौभाग्य की बात है। बहुत बहुत धन्यवाद "
Nov 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"कविता पर मोहित हूँ प्रिय"
Nov 23
vijay nikore commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"अच्छी कविता के लिए बधाई।"
Nov 23
Mohit mishra (mukt) commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आदरणीय मनोज जी अच्छी रचना, बधाई "
Nov 21
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय आरिफ साहब, आपको रचना पसंद आयी यह मेरा सौभाग्य है।  शुक्रिया "
Nov 21
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय सुरेंद्र सर, रचना को सम्मान देने का शुक्रिया "
Nov 21
Mohammed Arif commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय मोहित मुक्त जी आदाब, बहुत अच्छा दर्द छलकाया आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 21
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त

आज फिर दर्द छलका। आँख फिर आज रोयी। प्रिये, दिल ने फिर से- स्मृतियाँ संजोई।शिशिर रात में वह- प्रणय के मधुर क्षण। चांदनी की चादर पर - हम और तुहिन-कण। नर्म लबों पर- पीयूष सा वो पानी। हौले हवा में - वो घुलती जवानी। पल पास हैं सब- तुम हीं हो खोयी। आज फिर दर्द छलका। आँख फिर आज रोयी। शलभ बन जला मैं, शिखा प्यार की थी। बात इच्छाओं के, बस सत्कार की थी। जुदा मोड़ पर , आज दोनों खड़े हैं। गम के कड़े शूल , दिल में गड़े हैं। आँसू से तुमने- भी आँखे भिगोई। आज फिर दर्द छलका। आँख फिर आज रोयी।मौलिक और…See More
Nov 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आद0 मोहित जी सादर अभिवादन, बढ़िया रचना लिखी आपने, हार्दिक बधाई आपको इस प्रस्तुति पर।"
Nov 20
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"मेरी बात को मान देने के लिए धन्यवाद,इस त्रुटि को दुरुस्त कर लीजियेग ।"
Nov 20
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय लक्ष्मण जी कविता पर उपस्थिति का बहुत बहुत शुक्रिया "
Nov 20
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आदरणीय समर सर आदाब , आपकी बात अक्षरशः सही है। नज़रे इनायत का शुक्रिया। "
Nov 20

Profile Information

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Male
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allahabad
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allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त

आज फिर दर्द छलका।

आँख फिर आज रोयी।

प्रिये, दिल ने फिर से-

स्मृतियाँ संजोई।

शिशिर रात में वह-

प्रणय के मधुर क्षण।

चांदनी की चादर पर -

हम और तुहिन-कण।

नर्म लबों पर-

पीयूष सा वो पानी।

हौले हवा में -

वो घुलती जवानी।

पल पास हैं सब-

तुम हीं हो खोयी।

आज फिर दर्द छलका।

आँख फिर आज रोयी।



शलभ बन जला मैं,

शिखा प्यार की थी।

बात इच्छाओं के,

बस सत्कार की थी।

जुदा मोड़ पर ,

आज दोनों खड़े…

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Posted on November 20, 2017 at 8:30am — 13 Comments

भारत-शब्दचित्र:-मोहित मुक्त

लोकतंत्र-शोकतंत्र-जनतंत्र-भजनतंत्र।

जन को दुत्कार-सत्ता से प्यार।

प्रजातंत्र में उगते राजकुमार।

विदेश की रानी, भाषण का नरेश।

समता के वादे, भय का परिवेश।

राजनीती-ताजनीति।

कूटनीति-झुठनीति।

प्रतिबद्धता-आबद्धता।

दिखावे की संबद्धता।

कुविचार-भ्रष्टाचार।

बेईमानों की सरकार।

वादे वादे और वादे।

कोष लूटने के इरादे।

भूख-बेरोजगारी।

पीड़ा-लाचारी।

दंश-बीमारी।

प्रजा-बिचारी।

स्त्री-असुरक्षा।

गौ की रक्षा।

समाज-गंदे।…

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Posted on November 6, 2017 at 8:43am — 8 Comments

क्या यहीं भारत का भाग्य है?

विच्छुरित है अन्नदाता का सपना। 

तृषित रक्त के नेता अपना। 



माँ भारती के सेवा-कर्ता ,

आज भूख से पोषित हैं। 

पैदावार देकर भी ,

रक्तरंजित और शोषित हैं। 



तपोनिष्ठ इतिहास का ,

क्या यहीं त्याग है?

क्या यहीं भारत का भाग्य है ?

क्या यहीं भारत का भाग्य है ?

.

सुधार-विकास के नारों से।

अंधभक्ति या अंधप्रचारों से।

.

साथ पर्व…

Continue

Posted on November 1, 2017 at 4:00pm — 10 Comments

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त

विश्व पटल की बात तो छोडो ,

भारत के सर्वस्व भूमि पर ,

त्याग आपसी रंजिश को ,

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

विदेशी भाषाओं से कबतक ,

टूटेगा सबका सम्मोहन ?

हेमलेट को छोड़ जन-मन ,

मेघदूत कब गायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

निराला, दिनकर, प्रसाद से ,

जिसके प्रखर सपूत हुवे ,

उस माँ को सम्मान दिलाने ,

नव-भारत कब जग पायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

गर्वान्वित होगा भारत-वर्ष ,

कब…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 12:00pm — 24 Comments

 
 
 

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