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Mohit mishra (mukt)
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पंकजोम " प्रेम " commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"बहुत ख़ूब भाई जो वाह"
Friday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हाँ, तुमने प्यार सिखाया था:-मोहित मुक्त
"आदरणीय गिरिराज जी रचना पर उपस्थिती से मन प्रसन्न हो गया । आपकी बात सर आँखो पर"
Friday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त
"आदरणीय जी देर से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षमा। मेरी नयी रचनाओं में अशुद्धियाँ कम मिलती होंगी ,यह आप सब के मार्गदर्शन का परिणाम है। रचना पर अमूल्य राय देने के लिए धन्यवाद ."
Thursday
Mohit mishra (mukt) commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"वर्तमान हिंदी की सच्ची ब्यथा-कथा लिखा है आपने आदरणीया। बधाई "
Thursday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"सम्मानीय अलका जी रचना पर उपस्थिती के लिए धन्यवाद"
Thursday
अलका 'कृष्णांशी' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"सुंदर प्रस्तुति ,  हार्दिक बधाई आदरणीय "
Thursday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"आदरणीय लक्ष्मण जी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"हिंदी दिवस पर सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ।"
Sep 14
Mohit mishra (mukt) commented on KALPANA BHATT's blog post अधकटा पेड़(लघुकथा)
"विशालता के घमंड के दुष्परिणाम दर्शाती सार्थक रचना। बधाई आदरणीया"
Sep 14
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"आदरणीया कल्पना जी रचनावलोकन व विचार व्यक्त करने का आभार"
Sep 14
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"आदरणीय समर सर आपके उत्साह वर्धक बातों से मन गदगद हो गया। आभार"
Sep 14
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मुक्त साहिब आदाब,हिन्दी दिवस पर बढ़िया रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 14
KALPANA BHATT commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"सुंदर भाव | हार्दिक बधाई आदरणीय "
Sep 14

Profile Information

Gender
Male
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allahabad
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allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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Mohit mishra (mukt)'s Blog

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त

विश्व पटल की बात तो छोडो ,

भारत के सर्वस्व भूमि पर ,

त्याग आपसी रंजिश को ,

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

विदेशी भाषाओं से कबतक ,

टूटेगा सबका सम्मोहन ?

हेमलेट को छोड़ जन-मन ,

मेघदूत कब गायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

निराला, दिनकर, प्रसाद से ,

जिसके प्रखर सपूत हुवे ,

उस माँ को सम्मान दिलाने ,

नव-भारत कब जग पायेगा ?

जाने वह क्षण कब आएगा ?

गर्वान्वित होगा भारत-वर्ष ,

कब…

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Posted on September 14, 2017 at 12:00pm — 24 Comments

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था:-मोहित मुक्त

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

सूखे तटबंधों को तुमने ,

प्रेम सलिल से सिंचित करके ,

वैरागी बंजर अंतर में ,

आसक्ति के अंकुर बोकर ,

तुमने प्रीत जगाया था ,

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

जीवन के भूसर रंगों को ,

प्रेम वर्ण से हरित रंजित कर ,

अनल जलन से पीड़ित को ,

हिमानिल सा तन-मन छू-छूकर ,

तुमने प्रीत जगाया था ,

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

चिर तृषार्त कोरे हृदय को ,

मधु-द्राक्षासव पान कराकर ,…

Continue

Posted on September 12, 2017 at 9:30am — 10 Comments

अभिमन्यु की प्रेयसी:- मोहित मुक्त

गतांक से आगे

बैठी हुइ निज कक्ष में कुशुमाभूषणों से सजी।

अनभिज्ञ होनी के लेख से अभिमन्यु की प्रेयसी।

अभी-अभी कर गयी है दासी दिब्य श्रृंगार।

चूड़ामणि, कानो में कुण्डल, गले में पुष्पाहार।

स्वर्णाभूषणों से प्रखर हो चमक रहा है मस्तक।

बालपन की चौखट पर दे गया यौवन दस्तक।

अभी-अभी तो बंधी है प्रणय की रश्मि बंधों से।

नया-नया परिचय हुआ है शाश्वत प्रेम संबंधों से।

अभी तो हाथों से नहीं उतरी सुहाग की लाली।

अब तक महक रही…

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Posted on August 21, 2017 at 9:14am — 4 Comments

माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा:- मोहित मुक्त

आज निकला हूँ उड़ने की ख़्वाहिश लिये ,

पर दुनिया के आसमान में कहाँ तक जाऊंगा ,

माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

दूर आँचल से तेरे तलाशता हूँ जो ,

कुछ साथी ,कुछ सपने,कुछ अपने ,

हो सकता है मिल जाये मंज़िल मेरी ,

पर स्नेहमयी बातों का सुख कहाँ पाउँगा ,

माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

मुझे पता है समेट लोगी अंतर में अपने ,

भूल शैतानियाँ मेरी, भूल नादानियाँ मेरी ,

जीवन के हर पल हर गलती पर क्षमादान ,

भला तेरे हृदय…

Continue

Posted on August 20, 2017 at 8:00am — 14 Comments

 
 
 

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