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Mohit mishra (mukt)
  • Male
  • allahabad,u.p
  • India
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Mohit mishra (mukt)'s Page

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Mohit mishra (mukt) commented on Hari Prakash Dubey's blog post कालिख: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"वर्तमान परिदृश्य को शब्दबद्ध करने का बहुत रचनात्मक कार्य किया है आपने आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी | "
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल- कब किसी से यहाँ मुहब्बत की
"आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी अच्छी कोशिश रही | महानुभावों द्वारा सुझाए गए बातों का ख्याल रखते हुए प्रयास करते रहिए | आपसे इससे कहीं ज्यादा बेहतरी की उम्मीद है | सादर "
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on Ravi Shukla's blog post गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत
"आदरणीय शुक्ला जी बहुत हीं ऊर्जापूर्ण गीत लिखा आपने | बधाई कुबूल करें | "
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"आदरणीय विजय निकोर जी कविता पर ध्यान देने एवं उत्साह बढ़ाने के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
yesterday
vijay nikore commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"प्रण करो तुम आज हम भारत को स्वर्णतरू बना देंगे ,कल के विश्वगुरु को फिर,हम कल का विश्वगुरु बना देंगे | ... अच्छी, प्रेरणा से भरपूर रचना के लिए बधाई।"
yesterday
Mohit mishra (mukt) commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"आदरणीय समर सर गज़ब की गज़ल कही है आपने। आपके शब्दार्थों के कारण गज़ल का भाव समझ पाया। इसके लिए आभार"
Monday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/2)
"आदरणीय आरिफ जी अच्छी गज़ल कही आपने। हाँ, उसकी रचनाओं में, रहता कुछ तो चिंतन है । उनसे रिश्ता है लेकिन , रहती थोड़ी अनबन है"
Monday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"आदरणीय आरीफ जी आपकी इस टिप्पणी ने गदगद कर दिया। आपके सुझावों का आगे भी हमेशा की तरह मुझे आवश्यकता रहेगी"
Sunday
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"आदरणीय समर सर उत्साह वर्धन के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
Sunday
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Mohammed Arif commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"प्रिय मोहित मुक्त जी आदाब, प्रस्तुत कविता के स्वर में एक आग्रह भी है , आक्रोश भी झलकता है , देशभक्ति की छटपटाहट भी है, मातृभूमि को बचाने और एकजुटता का आग्रह भी धीमे स्वर में मुखरित होने का प्रयास कर रहा है । कुल मिलाकर संदेश भी है, आग्रह भी है और…"
Sunday
Mohit mishra (mukt) commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"सरल शब्दों और साधारण वाक्यों में असाधारण अभिव्यक्ति | सुन्दर संस्मरण "
Sunday
Mohit mishra (mukt) commented on vijay nikore's blog post झंझावात
"वाह क्या मर्मस्पर्शी भाव हैं , और क्या प्रवाहमयी कविता है | मज़ा आ गया "
Sunday
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त

अन्तर्वेदना से छिन्न-भिन्न आक्रांत उर की मर्म कराहें ,अश्रुनिमग्न कातर स्वर में पूछती हैं किसको पुकारें |आह भारत-वर्ष हाय क्या यहीं रह गया है शेष ?स्वर्णयुक्त इतिहास का-कुछ ,रहा नहीं भग्न-अवशेष ?क्यों नहीं कुक्षि तेरी अब कोई अशोक जन्माती है ?क्यों नहीं स्वसम्मान की आज ललकारें लहलहाती हैं ?जनता कोई खिलौना है-क्या, गणतंत्रता की सत्ता में ?नहीं तो फिर गौण-क्यों ,बन गयी है महत्ता में ?रे जागो जनतंत्र के-प्रहरी, उर्जस्वित-मतवालों ,रे हिमगिरि सदृश्य-मसृण, माँ भारती के लालों |निकलो, मैले वस्त्रों को…See More
Sunday
Mohit mishra (mukt) commented on Samar kabeer's blog post 'ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत'
"बेहतरीन रचना | बधाई हो "
Jul 19
Mohit mishra (mukt) commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post प्रेयसी के संग कल्पना के पल :- मोहित मुक्त
"आदरणीय  Ravi Shukla जी कविता पर उपस्थिति होने एवं त्रुटिअवलोकन के लिए दिल से शुक्रिया | मेरी रचनाओं में सम्पूर्णता लाने के लिए आप जैसे मेहनीय लोगों के सुझावों का हमेशा से पालन करता रहा हूँ | अगली रचनाओं में शायद ऐसी शिकायत आपको न होगी |…"
Jul 18

Profile Information

Gender
Male
City State
allahabad
Native Place
allahabad univercity
Profession
student
About me
SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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Mohit mishra (mukt)'s Blog

जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त

अन्तर्वेदना से छिन्न-भिन्न

आक्रांत उर की मर्म कराहें ,

अश्रुनिमग्न कातर स्वर में

पूछती हैं किसको पुकारें |

आह भारत-वर्ष हाय

क्या यहीं रह गया है शेष ?

स्वर्णयुक्त इतिहास का-

कुछ ,रहा नहीं भग्न-अवशेष ?

क्यों नहीं कुक्षि तेरी

अब कोई अशोक जन्माती है ?

क्यों नहीं स्वसम्मान की

आज ललकारें लहलहाती हैं ?

जनता कोई खिलौना है-

क्या, गणतंत्रता की सत्ता में ?

नहीं तो फिर गौण-

क्यों ,बन…

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Posted on July 23, 2017 at 8:09am — 6 Comments

प्रेयसी के संग कल्पना के पल :- मोहित मुक्त

आओ सुनाता हूँ तुम्हें एक कहानी,

वो जो है मेरे सपनों की रानी,

मदमस्त अल्हड़ नवयौवना है,

बस इतना जानो वो मेरी कल्पना है|

जी करता है बन के मैं पायल,

 नाचूँ प्यारी के साथ सुधि विसरा के,

बन के लाली उसके होठों पे छा जाऊं मैं,

या बन काजल बसूँ उसके आँखों में जाके|

सरसो के पीले खेतों में वो ,

ले अंगड़ाई और मै उसको निहारूं,

थोड़ा शरमा के देखे थोड़ा मुस्कुराए ,

वो मुझपे और मै उसपे वारी जाऊं |

नदी का किनारा हो और उसका…

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Posted on July 16, 2017 at 12:00pm — 10 Comments

पिघलता मुखौटा - मोहित मुक्त

ऋतू परिवर्तन हो चूका है ,

धकेल ठंढ की रजाइयों को ,

लेकर लू की सौगात ,

ग्रीष्म अपने उफान की ओर,

कदम दर कदम बढ़ाते हुए ,

पिघला रहा है दुनिया का मुखौटा ,

डिग्री डिग्री पारा चढ़ाते हुए ,

जो बेबस थे कल तक अर्धनग्न ,

ठिठुरती ठंढी थपेड़ों से,

वो फिर बेबस है बेघर है ,

लू की गर्म चपेटों से ,

ओवरब्रिज के खम्भों की ओट में ,

गर्म आँधियो से बचने के लिए ,

मजबूर वो निस्तेज आँखों वाला बच्चा ,

क्या सोचता होगा जब…

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Posted on May 14, 2017 at 9:38am — 6 Comments

रानी सारन्धा (भाग -1):-मोहित मुक्त

अँधेरी रात थी पंक्षी चहककर निवीणो मे सुप्त थे।

पर बुन्देल की दो नारियों के नयन निंद्रा मुक्त थे।

अनिरुद्ध रानी शीतला के मांग सुहाग की लाली।

सारन्धा थी उस योद्धा की भोली बहन मतवाली।

था वक्त जब योद्धाओं को बाहुबल की आन थी।

रणक्षेत्र की शौर्यगाथाएं उनकी प्रखर पहचान थी।

तब युद्धभूमि से जीतकर हीं आना था तो आते थे।

वरना मस्तक रणदेवी को हँसते हंसते चढ़ाते थे।

अनिरुद्ध था बुंदेलों की आँखों का चमकता तारा।

दोस्तों का परम दोस्त…

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Posted on March 28, 2017 at 9:30am — 9 Comments

 
 
 

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