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Harihar Jha
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Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"धन्यवाद, नीलम जी!"
15 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"आदरणीय हरिहर झा जी,  नमस्कार।  झूमते सावन पर बढ़िया प्रस्तुति।  बधाई स्वीकार करें। "
16 hours ago
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"शुक्रिया  मोहम्मद जी!"
Monday
Mohammed Arif commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"आदरणीय हरीहर जी आदाब,                       सावन की मस्ती में डूबी बहुत बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"धन्यवाद , समर जी!"
Friday
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"जनाब हरिहर झा साहिब आदाब,सावन के मौक़ेपर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें "
Friday
Harihar Jha posted a blog post

झूमता सावन

 झूमता सावन, हिलोरे ले रहा,भीगता यौवन।   बदली चली सजधज अनोखी,  लुट गई   देह के शृंगार पर;जग  भले बेहाल,  बिसात क्या, बेहोशी के कगार पर; रूठ बैठी  क्यों भला, इधर  चपला के उठे जो नैन;  बूँद बरसीठिठोली करती हुईपर भस्म थी अंगार पर; धधकती लिप्सा,  जल बरसने की चाह में हुआ हवन। लटें उलझी, झकझोरती,पागल हुई बयार में, उड़े आँचल;     झाड़ियाँ चल दी उखड़, आकाश में,हो गई चंचल;क्रोध में सुन्दर लगे परसमेटा अपना लिबास;गुस्ताख नज़रें छेड़ती, मादक हवा बहे ऐसी,  जिया जाय मचल;  अंधड़ मचा, उत्पात में  चली वर्षा कोप भवन…See More
Friday
Harihar Jha shared Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post on Facebook
Mar 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Harihar Jha's blog post पत्थरों को क्या कहें
"हार्दिक बधाई...अच्छी कविता हुई है ..."
Mar 11
Samar kabeer commented on Harihar Jha's blog post पत्थरों को क्या कहें
"जनाब हरिहर झा साहिब आदाब,अच्छी लगी आपकी रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । कृपा कर रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें,ताकि रचना पर कुछ कहने में पाठकों को आसानी हो,ऐसा इस मंच का नियम है ।"
Mar 10
Harihar Jha shared amod shrivastav (bindouri)'s blog post on Facebook
Mar 10
amod shrivastav (bindouri) commented on Harihar Jha's blog post पत्थरों को क्या कहें
"आ हरिहर दादा प्रणाम  बेहतरीन कविता के लिए सादर नमन  दूसरे और तीसरे में जो कहा मन को छू गया .. वर्तमान में स्थितियां इससे भी कहीं ज्यादा भयंकर है ।"
Mar 10
Harihar Jha posted a blog post

पत्थरों को क्या कहें

शर्म से गर्दन झुकी,पत्थरों को क्या कहें। बौछार फैंकी,छेड़ कर, मुस्का रहा छलियाकीचड़ उछाला, ताव से  चटखा रहा  कलियाँपाषाण दिल चुपचापकाटे, चिकोटी लोफरस्थिर व्योम ताके है,घुमन्तू बादल का डर तारे लो बुझ गयेक्रंदन स्वर गूंज रहे। तमस की घुसपैठआतंकी लगाये घातरौंद फूलों  को,निकाली गंध की बारातपिशाच की वृत्ति जो उभरी  हाय! गँदलापनसंघर्ष, सिसकी मेंघायल हो गया तन मन भय लगे हैवान सेहाथ फिर किसका गहे? टूट  गई हड्डियाँ,  चटख  जाती पसलीचीख गूँजी गगन में ,  तूफान था असलीकोतवाली झूमती,सरक जाते नोटतराजू में…See More
Mar 10
Harihar Jha commented on somesh kumar's blog post तितली और सफ़ेद गुलाब
"बहुत सुन्दर!"
Feb 12
Harihar Jha shared somesh kumar's blog post on Facebook
Feb 12
somesh kumar commented on Harihar Jha's blog post सुर्ख़ियों में कहाँ दिखती?
"राजनीति बुद्धिजीवी मिडिया तीनो को अपनी इस व्यंग्य कविता से आप ने धो दिया l"
Feb 12

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Male
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Melbourne Victoria Australia
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Banswara Rajasthan India
Profession
Retired
About me
I love poetry

Harihar Jha's Blog

झूमता सावन

 

झूमता सावन, हिलोरे ले रहा,

भीगता यौवन।  

 

बदली चली सजधज अनोखी,  

लुट गई   

देह के शृंगार पर;

जग  भले बेहालबिसात क्या

बेहोशी के कगार पर; 

रूठ बैठी  क्यों भला

इधर  चपला के उठे जो नैन;  

बूँद बरसी

ठिठोली करती हुई

पर भस्म थी अंगार पर; 

धधकती लिप्सा,  

जल बरसने की चाह में हुआ हवन।

 

लटें…

Continue

Posted on August 10, 2018 at 4:08am — 6 Comments

पत्थरों को क्या कहें

शर्म से गर्दन झुकी,

पत्थरों को क्या कहें।

 

बौछार फैंकी,

छेड़ कर, मुस्का रहा छलिया

कीचड़ उछाला, ताव से  

चटखा रहा  कलियाँ

पाषाण दिल चुपचाप

काटे, चिकोटी लोफर

स्थिर व्योम ताके है,

घुमन्तू बादल का डर

 

तारे लो बुझ गये

क्रंदन स्वर गूंज रहे।

 

तमस की घुसपैठ

आतंकी लगाये घात

रौंद फूलों  को,

निकाली गंध की बारात

पिशाच की…

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Posted on March 10, 2018 at 8:30am — 3 Comments

सुर्ख़ियों में कहाँ दिखती?

सुर्ख़ियों में कहाँ दिखती, 

खग मृग की  तान   

 

खबर है पत्ती खिला कर,

नोट बस खुद ही चबाये

लात मारी, सीढ़ी चढ़े जब,  

विरोधी न चढ़ पाये

 

देख लो, मन्त्री पद की 

कुर्सियों की शान

 

अगली खबर  है  नग्न लेखन,

चित्र अश्लिल लगा लिये

साहित्य कह कर चैक ले

सरस्वती का संग किये  

 

कुण्ठा से ग्रसित लेखन  

लिखता…

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Posted on February 11, 2018 at 3:00pm — 2 Comments

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Neelam Upadhyaya commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गीत- प्यार के आगे
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