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गाव में चारो तरफ गहमा गहमी लागल रहुये , जेकरा के देखा उहे बेआस्त हमारा कुछ समझ में न आवत रहुये की हमर गाव जवान हमेशा सुस्त रहेला आज एकरा में इतना उमंग कहा से आ गइल तबे हमारा हरी काका से भेट भइल हरी काका से हम पूछनी का बात बा काका , अब रुआ लोगिन के बता दी की हरी काका उहे आदमी हाउअन जेकर गलत समय पर जनम हो गइल बा इनकार सतजुग में पैदा होखे के चाहत रहे , छोरी आई कहानी के आगे बढावल जाव , ता हरी काका कहलन की एगो मठिया पर सन्यासी आइल बारन जे बहुत कुछ बतावत बारन हमू ओही जा जात बनी , हमारो जिज्ञासा बढ़ गइल हमहू मठिया के तरफ चल देनी , अरे बाह इ हम का देखत बनी जेकरा के इ लोग साधू कहत बा उ ता एक दम फ़िल्मी हीरो लगत बा सुन्दर चेहरा दाढ़ी मुछ गाएब भगवा कपड़ा में मनमोहक केहू भी उनकर हो के रह जाई, अभी हम बाबा के लगे जाये के सोचत रहनी तबे मलकिनी आपन पतोह के लेके आइली हमार कदम रुक गइल उनका के देखते महाराज कहले कवनो फायदा न बरका बाधा बा बाधा दूर करे खातिर पूजा पाठ करे के पारी, तब मलकिनी कहली बाबा जवन खर्च होई हम करब राउआ एकरा के ठीक कर दी , तबे उनकर पतोह कहलस हमारा कुछ नइखे भइल माँ जी इहा बिना मतलब के ले आइल बनी हमारा के , तभी बाबा कहलन जे परेसान रहेला ओकरा इहे बुझाला अगर राउआ के हमारा पर बिस्वास बा ता हाई ली एगो कागज के टुकरा जवाना पर कुछ लिखल रहे दे के सब सामान माँगा ली कलह अमावास हा हम राउआ घर पर आके काम करब मलकिनी चल गईली हमहू राम सलाम का के चले लगनी ता हमारा लगे हरी काका आके कहले बबुआ मलकिनी बेकार के इहा आइली हा उनकर ता आपन बेटा के डाक्टर के दिखावे के चाही उ दारू पि के आपना के बर्बाद का देले बा बाप कैसे बनी दवाई से ठीक होई ता बनियो सके ला , तबे मालिक के छोटकू लाईका उहा अइलान हम कहानी का हल बा राजू ता उ कहलन ठीक नइखे भैया राउये चल के मई के समझाई ना इहा अइला से कोई फायदा नइखे भैया अन्दर से खोखला हो गइल बारन उनकर दवाई होई ता .... हम कहानी तू ठीक कहत बार चला , हमनी दुनु आदमी मलकिनी के लगे गइनी सन मलकिनी सुने के तैयार ना पूजा के तयारी होखे लागल तभी भौजी हमारा लगे आइली हम राजू और उ मिल के एगो प्लान बनवानी सन जवन बाद में कामयाब भइल ओ प्लान के अनुसन हमहू पूजा में आ गइनी पूजा सुरु होते ही उ साधू एक एक चिलाइल भौजी के तरफ कुछ फेकलास ओकरा बाद हवन में कुछ फेकलास ओमे से बहुत जोरदार आग निकलल सब कोई ये कमरा से निकल जाव एकरा ऊपर बरका प्रेत के साया बा अभी भगावे के परी भवजी धीरे धीरे बेहोश होत रहली मलकिनी के कहला पर हमनी के बहार आ गइनी और हम राजू के इशारा कईनि अन्दर से ओकर और जोर जोर से आवाज आवे लागल राजू उहा से चल गइल थोरे देर बाद राजू के आवाज आइल हरामी हम तोरा के ना छोरम मलकिनी परेशान तबे ओ घर मेसे बल पकर के घसीटत ओ साधू के लेके राजू आइल और कहलस भैया राउआ ठीक रहनी हा अगर हम खिरकी ना खोल के रखले रहती ता इ बेहोश भौजी के इज्जत लुट लेले रहित मालकिन इ सुन के बेहोश हो के गिर गइली दूसरा दिन ओ साधू के मुह करिया कर के गदहा पर बैठा के घुमावत रहनी सन तबे मलिकार आपन बड बेटा के ले के अइलान और उ बतावालन अब इ ठीक हो गइल बारन , ता हम कहनी बाकिर इह मालकिन गरबर का देले रहली हा पूरा बात जनला के बाद मालिक लाठी उठा के मारे लागले मान ली इ एगो काल्पनिक कहानी बा एमे भौजी बच गइली का हकीकत में अइसन हो पाई हमार जबाब बा ना ता कहे ना हमनी के पाहिले से ही सावधान रही जा ,

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गुरु जी आप जो एक लघु कहानी के माध्यम से सन्देश देना चाहते है ,उसमे आप पूरी तरह से कामयाब है, कहानी की संरचना और उसकी प्रेषण बहुत ही बढ़िया है, अंधविश्वास इस समाज को गर्त मे लेते जा रहा है, जिस दिन समाज से अंधविश्वास ख़त्म हो जायेगा उसी दिन इन पाखंडी बाबा सब का अंत भी हो जायेगा |
bahut badhiya guru je.....hum bhi same ganesh jee wala comment hi ehja post kar rahal bani kahe ki hum bhi ehe kahe ke chahat bani jaun ganesh bhaiya kahle bani........
गुरु जी आप जो एक लघु कहानी के माध्यम से सन्देश देना चाहते है ,उसमे आप पूरी तरह से कामयाब है, कहानी की संरचना और उसकी प्रेषण बहुत ही बढ़िया है, अंधविश्वास इस समाज को गर्त मे लेते जा रहा है, जिस दिन समाज से अंधविश्वास ख़त्म हो जायेगा उसी दिन इन पाखंडी बाबा सब का अंत भी हो जायेगा
Namaskar Bhai,
Aaj ke time ke shadhu log sadhu na ba,
sawadhu ba...sawadhu ba.

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"बहुत-बहुत धन्यवाद। "
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आ. प्रतिभा बहन , सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई । "
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