For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142

विषय - "जय हिंद"

आयोजन अवधि- 13 अगस्त 2022, दिन शनिवार से 14 अगस्त 2022, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 13 अगस्त 2022, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

Views: 436

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, सुंदर कुण्डलिया छंद सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

हार्दिक आभार आदरणीय दयाराम मेठानी जी 

गीतिका

---------
जयहिन्द जयहिन्द का नारा, हम तो सदा गायेंगे,
आजादी का अमृत महोत्सव, नगर डगर मनायेंगे।

हर कार्य हमारा हो उत्तम, बने आत्म निर्भर अब हम,
तिरंगा गगन में खुशियों का, शान से लहरायेंगे।

विकसित हो देश सदा अपना, याद हमे यह रखना है,
शान तिरंगे की दुनिया में, हम ही तो बढ़ायेंगे।

दुश्मन है हमारा पड़ौसी, उसको सबक सिखाना है,
फैले है गद्दार देश में, उन सबको भगायेंगे।

देखेगी दुनिया ‘मेठानी’, विश्व पटल पर भारत को,
महकेगी अपनी भारत भू, विश्व गुरू बनायेंगे।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
- दयाराम मेठानी

देश प्रेम और जोश में पगी इस गीतिका के लिये हार्दिक बधाई आदरणीय

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।

आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुन्दर गीतिका हुई है। हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।

जय हिन्द

रवि किरण नूतन, नवल है आज की यह प्रात
गूँजता जय हिंद का नारा सुबह से भ्रात

जन प्रफुल्लित, उल्लसित हो राष्ट्र-प्रेम विभोर
बद्ध लय जय हिन्द का नारा लगे चँहु ओर

झूमते, मुसकाते; बालक, वृद्ध औ युव वृन्द
मनाते अमृत महोत्सव , हॄद भरे आनन्द

ले रहे हैं प्रतिज्ञा सब , देश की है आन

स्वस्थ, मुक्त वतन रहेगा, है लिया मन ठान

देश की उन्नति का रथ दौड़ेगा फिर अति वेग
चकित होगा विश्व सारा, देख यह परिवेश

मौलिक एवं अप्रकाशित

आदरणीय उषा अवस्थी जी, सुंदर सृजन हेतु बहुत बहुत बधाई।

आदरणीय दयाराम मेथानी जी , सृजन सुन्दर लगा ,जानकर  खुशी हुई।  हार्दिक आभार आपका

इस सुन्दर रचना के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया ऊषा अवस्थी जी

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"उचित है आदरणीय समर जी...ऐसा किया जा सकता है...जल्द ही सम्पूर्ण सुधार के साथ रचना एडिट करूँगा...सादर"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (शुक्र तेरा अदा नहीं होता)
"//मक़्ता में 'मांगे' को 'माँगे' लिखना ज़्यादा मुनासिब होगा// सहमत।"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं (ग़ज़ल)
"मुहतरम रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, क्या ख़ूब ग़ज़ल कही है, हर एक शे'र कमाल है,…"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (शुक्र तेरा अदा नहीं होता)
"मुहतरम रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद बाइस-ए-शरफ़ है, ज़र्रा नवाज़ी और हौसला…"
6 hours ago
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"//एक जिज्ञासा और है क्या "मुस्कुराहट और हरारत" एक साथ काफ़िये के रूप में सहीह है// नहीं,ये…"
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (शुक्र तेरा अदा नहीं होता)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आदाब! इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर आप को ख़ूब सारी दाद और बधाई! अगर…"
11 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"जी आदरणीय महेंद्र जी...एक नई जानकारी हुई...यही तो इस मंच की विशेषता है...आपका धन्यवाद"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए आभार व्यक्त करता हूँ...काफ़िये को लेकर नई जानकारी…"
12 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं (ग़ज़ल)

2122  /  1212  /  22हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैंमेरी क़िस्मत में क्यूँ अँधेरे हैं [1]एक अर्सा हुआ उन्हें…See More
12 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गुमान (लघुकथा)

सुषमा ने तकिया समीर के सिरहाने कर दी थी।अपना सिर किनारे पर रखा था जो कभी ढुलक कर तकिये से उतर गया…See More
12 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दशहरा पर्व पर कुछ दोहे. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दशहरा पर्व पर कुछ दोहे. . . .

दशहरा पर्व पर कुछ दोहे. . . .सदियों से लंकेश का, जलता दम्भ  प्रतीक । मिटी नहीं पर आज तक, बैर भाव की…See More
13 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service