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Subodh kumar's Discussions (18)

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सदस्य टीम प्रबंधन

"नेकी से गरीब हरकोई खुदगर्जी से अमीर क्यूं है इंसानियत के रंगो से फिकी इंसानी तस्वीर…"

Subodh kumar replied Oct 1, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-4 (Now Close)

268 Oct 5, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"tahe dil se dhanyabaad asha jee.."

Subodh kumar replied Sep 19, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"sunder rachan sanjeev jee.."

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"bahut khub navin jee.."

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"बहुत खूब मुमताज जी ...क्या आपने ग़जल लिखा है , शानदार ...आपके ग़जल की हर एक शेअर कमा…"

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"कुछ शब्द, जो आपने ग़जल में इस्तेमाल किया है वो जँच नहीं रही है...बांकी आपकी ग़जल अच्…"

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"deepak jee ghajal to bahut sunder likha hai aapne.per ye line दुनियां वाले लगाते रहे…"

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"पाके भी का़यनात नज़रे नमी रह गई ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गई यॅू तो आबाद जहां है म…"

Subodh kumar replied Sep 18, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-3 (Now Closed)

380 Sep 23, 2010
Reply by योगराज प्रभाकर

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
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ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
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Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
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